पंचांग राशिफल भक्ति का मार्ग त्योहार
चालीसा

श्री हनुमान चालीसा | श्री गुरु चरन सरोज रज निज

3 मिनट पढ़ें

दोहा

श्री गुरु चरन सरोज रज निज मन मुकुरु सुधारि
बरनऊ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चरि

चौपाई

बुद्धिहीन तनू जानकी सुमिरौ पवन- कुमार
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर जय कपीस तिहुँ लोक उजागर
राम दूत अतुलित बल धामा अंजनी पुत्र पवनसुत नामा
महाबीर बिक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमति के संगी
कंचन बरण बिराज सुबेसा कानन कुंडल कुंचित केसा
हाथ ब्रज और ध्वजा बिराजै कांधे मुंज जनेऊ साजे
शंकर सुवन केसरी नंदन तेज प्रताप महा जग वंदन
विद्यावान गुनी अति चातुर राम काज करिबे को आतुर
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया राम लखन सीता मन बसिया
सुक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा विकट रूप धरि लंक जरावा
भीम रूप धरि असुर संहारे रामचंद्र के काज संवारे
लाये सजीवन लखन जियाये श्री रघुवीर हरषि उर लाये
रघुपति किन्ही बहुत बड़ाई तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा नारद सारद सहित अहीसा
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते
तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा राम मिलाय राज पद दीन्हा
तुम्हरो मंत्र विभीषण माना लंकेश्वर भये सब जग जाना
जुग सहस्त्र जो जन पर भानु लिल्यो ताहि मधुर फल जानु
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं जलधि लांधि गये अचरज नाहिं
दुर्गम काज जगत के जेते सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते
राम दुवारे तुम रखवारे होत न आज्ञा बिनु पैसारे
सब सुख लहै तुम्हारी सरना तुम रक्षक काहू को डरना

आपन तेज सम्हारो आपै तीनों लोक हांकते कांपै
भुत पिशाच निकट नहिं आवै महावीर जब नाम सुनावै
नासै रोग हरे सब पीरा जपत निरन्तर हनुमत बीरा
संकट ते हनुमान छुडावै मन क्रम वचन ध्यान जो लावै
सब पर राम तपस्वी राजा तिनके काज सकल तुम साजा
और मनोरथ जो कोई लावै सोई अमित जीवन फल पावैं

चारोँ जुग परताप तुम्हारा है परसिद्ध जगत उजियारा
साधु संत के तुम रखवारे असुर निकंदन राम दुलारे
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता अस बर दीन जानकी माता
राम रसायन तुम्हरे पासा सदा रहो रघुपति के दासा

तुम्हरे भजन राम को पावै जनम जनम के दुःख बिसरावै
अंत काल रघुबर पुर जाई जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई
और देवता चित्त न धराई हनुमत सेई सर्व सुख करई
संकट कटै मिटै सब पीरा जो सुमिरै हनुमत बल बीरा
जय जय जय हनुमान गोसाई कृपा करहु गुरुदेव की नाई
जो सत बार पाठ कर कोई छुटहि बंदी महासुख होई
जो यह पढे हनुमान चलीसा होय सिद्धि साखी गौरीसा
तुलसीदास सदा हरि चेरा किजै नाथ ह्रदय महँ डेरा
पवनतनय संकट हरन मंगल मुरति रूप
राम लखन सीता सहित ह्रदय बसहु सुर भूप

दोहा

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। 
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥ ॥ 

इति श्री हनुमान चालीसा चालीसा ॥