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श्री शिव स्तोत्रम् शत नामावली | भगवान शिव के 108 पवित्र नाम, अर्थ, महत्व एवं पाठ विधि

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श्री शिव स्तोत्रम् शत नामावली | भगवान शिव के 108 पवित्र नाम, अर्थ, महत्व एवं पाठ विधि

श्री शिव स्तोत्रम् शत नामावली

श्री शिव स्तोत्रम् शत नामावली भगवान शिव के 100 पवित्र एवं दिव्य नामों का संग्रह है। सनातन धर्म में भगवान शिव को महादेव, महेश्वर, रुद्र, नीलकंठ, भोलेनाथ, पशुपतिनाथ, त्रिलोचन, विश्वनाथ आदि अनेक नामों से जाना जाता है। प्रत्येक नाम भगवान शिव के किसी विशेष स्वरूप, गुण, शक्ति और दिव्य लीला का परिचय देता है।

श्रद्धालु भगवान शिव के 100 नामों का पाठ सोमवार, श्रावण मास, महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत तथा दैनिक शिव पूजा के समय करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और भक्ति के साथ इन नामों का स्मरण करने से मन में शांति, साहस, वैराग्य, आत्मविश्वास और भगवान शिव के प्रति भक्ति की भावना बढ़ती है।


श्री शिव स्तोत्रम् शत नामावली क्या है?

शत नामावली का अर्थ है 100 पवित्र नामों की माला। भगवान शिव के इन 100 नामों में उनके विभिन्न स्वरूपों और दिव्य गुणों का वर्णन मिलता है। प्रत्येक नाम साधक को शिव के किसी विशेष गुण का स्मरण कराता है और आध्यात्मिक जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

भगवान शिव के प्रमुख नामों में—

  • महादेव

  • शंकर

  • रुद्र

  • नीलकंठ

  • त्रिलोचन

  • पशुपति

  • विश्वनाथ

  • गंगाधर

  • चंद्रशेखर

  • त्रिपुरांतक

  • उमापति

  • कैलाशपति

आदि नाम विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।


भगवान शिव के 100 नामों का महत्व

भगवान शिव के प्रत्येक नाम का अपना आध्यात्मिक महत्व है। उदाहरण के लिए—

  • महादेव – सभी देवताओं में श्रेष्ठ।

  • शंकर – कल्याण करने वाले।

  • नीलकंठ – समुद्र मंथन के विष का पान करने वाले।

  • त्रिलोचन – तीन नेत्रों वाले, जो ज्ञान और विवेक के प्रतीक हैं।

  • पशुपति – समस्त प्राणियों के स्वामी।

  • विश्वनाथ – सम्पूर्ण जगत के नाथ।

  • गंगाधर – जटाओं में गंगा धारण करने वाले।

  • चंद्रशेखर – मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाले।

इन नामों का स्मरण केवल पूजा का भाग नहीं, बल्कि भगवान शिव के आदर्शों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा भी है।


100 संख्या का धार्मिक महत्व

शत (100) संख्या पूर्णता, स्थिरता और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है। भगवान शिव के 100 नामों का पाठ साधक को बार-बार शिव के दिव्य गुणों का स्मरण कराता है और मन को ईश्वर की ओर केंद्रित करता है।


श्री शिव स्तोत्रम् शत नामावली के आध्यात्मिक लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और नियमित पाठ से निम्नलिखित आध्यात्मिक लाभ प्राप्त हो सकते हैं—

  1. भगवान शिव के प्रति भक्ति बढ़ती है।
  2. मन में शांति और सकारात्मक विचारों का विकास होता है।
  3. ध्यान एवं एकाग्रता में सहायता मिलती है।
  4. धैर्य, साहस और आत्मविश्वास की भावना मजबूत होती है।
  5. क्रोध, अहंकार और नकारात्मक सोच को नियंत्रित करने की प्रेरणा मिलती है।
  6. परिवार में सुख, शांति और आध्यात्मिक वातावरण बना रहता है।

महत्वपूर्ण सूचना: उपर्युक्त लाभ धार्मिक एवं आध्यात्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें किसी प्रकार के निश्चित भौतिक, चिकित्सकीय या चमत्कारी परिणाम की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।


श्री शिव स्तोत्रम् शत नामावली का पाठ कब करें?

भगवान शिव के 100 नामों का पाठ निम्न अवसरों पर विशेष शुभ माना जाता है—

  • प्रतिदिन प्रातःकाल

  • प्रत्येक सोमवार

  • श्रावण (सावन) मास

  • महाशिवरात्रि

  • मासिक शिवरात्रि

  • प्रदोष व्रत

  • श्रावण सोमवारी

  • ध्यान एवं रुद्राभिषेक के समय


श्री शिव स्तोत्रम् शत नामावली के पाठ की विधि

1. स्नान एवं शुद्धता

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

2. शिवलिंग अथवा भगवान शिव की प्रतिमा के समक्ष पूजा करें

घी या तिल के तेल का दीपक जलाएँ तथा धूप अर्पित करें।

3. पूजन सामग्री

  • बेलपत्र

  • गंगाजल

  • अक्षत

  • चंदन

  • भस्म

  • धतूरा

  • आक के पुष्प

  • सफेद पुष्प

  • फल एवं नैवेद्य

4. ध्यान करें

भगवान शिव के शांत एवं करुणामय स्वरूप का ध्यान करें।

5. शत नामावली का पाठ

श्रद्धा एवं एकाग्रता के साथ भगवान शिव के 100 नामों का उच्चारण करें।

6. आरती एवं प्रार्थना

पाठ पूर्ण होने के बाद शिव आरती करें और समस्त प्राणियों के कल्याण की प्रार्थना करें।


श्री शिव स्तोत्रम् शत नामावली (100 नाम)

  1. ॐ शिवाय नमः ॥
  2. ॐ महेश्वराय नमः ॥
  3. ॐ शंभवे नमः ॥
  4. ॐ पिनाकिने नमः ॥
  5. ॐ शशिशेखराय नमः ॥
  6. ॐ वामदेवाय नमः ॥
  7. ॐ विरूपाक्षाय नमः ॥
  8. ॐ कपर्दिने नमः ॥
  9. ॐ नीललोहिताय नमः ॥
  10. ॐ शंकराय नमः ॥ १० ॥
  11. ॐ शूलपाणये नमः ॥
  12. ॐ खट्वांगिने नमः ॥
  13. ॐ विष्णुवल्लभाय नमः ॥
  14. ॐ शिपिविष्टाय नमः ॥
  15. ॐ अंबिकानाथाय नमः ॥
  16. ॐ श्रीकंठाय नमः ॥
  17. ॐ भक्तवत्सलाय नमः ॥
  18. ॐ भवाय नमः ॥
  19. ॐ शर्वाय नमः ॥
  20. ॐ त्रिलोकेशाय नमः ॥ २० ॥
  21. ॐ शितिकंठाय नमः ॥
  22. ॐ शिवाप्रियाय नमः ॥
  23. ॐ उग्राय नमः ॥
  24. ॐ कपालिने नमः ॥
  25. ॐ कौमारये नमः ॥
  26. ॐ अंधकासुर सूदनाय नमः ॥
  27. ॐ गंगाधराय नमः ॥
  28. ॐ ललाटाक्षाय नमः ॥
  29. ॐ कालकालाय नमः ॥
  30. ॐ कृपानिधये नमः ॥ ३० ॥
  31. ॐ भीमाय नमः ॥
  32. ॐ परशुहस्ताय नमः ॥
  33. ॐ मृगपाणये नमः ॥
  34. ॐ जटाधराय नमः ॥
  35. ॐ क्तेलासवासिने नमः ॥
  36. ॐ कवचिने नमः ॥
  37. ॐ कठोराय नमः ॥
  38. ॐ त्रिपुरांतकाय नमः ॥
  39. ॐ वृषांकाय नमः ॥
  40. ॐ वृषभारूढाय नमः ॥ ४० ॥
  41. ॐ भस्मोद्धूलित विग्रहाय नमः ॥
  42. ॐ सामप्रियाय नमः ॥
  43. ॐ स्वरमयाय नमः ॥
  44. ॐ त्रयीमूर्तये नमः ॥
  45. ॐ अनीश्वराय नमः ॥
  46. ॐ सर्वज्ञाय नमः ॥
  47. ॐ परमात्मने नमः ॥
  48. ॐ सोमसूर्याग्नि लोचनाय नमः ॥
  49. ॐ हविषे नमः ॥
  50. ॐ यज्ञमयाय नमः ॥ ५० ॥
  51. ॐ सोमाय नमः ॥
  52. ॐ पंचवक्त्राय नमः ॥
  53. ॐ सदाशिवाय नमः ॥
  54. ॐ विश्वेश्वराय नमः ॥
  55. ॐ वीरभद्राय नमः ॥
  56. ॐ गणनाथाय नमः ॥
  57. ॐ प्रजापतये नमः ॥
  58. ॐ हिरण्यरेतसे नमः ॥
  59. ॐ दुर्धर्षाय नमः ॥
  60. ॐ गिरीशाय नमः ॥ ६० ॥
  61. ॐ गिरिशाय नमः ॥
  62. ॐ अनघाय नमः ॥
  63. ॐ भुजंग भूषणाय नमः ॥
  64. ॐ भर्गाय नमः ॥
  65. ॐ गिरिधन्वने नमः ॥
  66. ॐ गिरिप्रियाय नमः ॥
  67. ॐ कृत्तिवाससे नमः ॥
  68. ॐ पुरारातये नमः ॥
  69. ॐ भगवते नमः ॥
  70. ॐ प्रमधाधिपाय नमः ॥ ७० ॥
  71. ॐ मृत्युंजयाय नमः ॥
  72. ॐ सूक्ष्मतनवे नमः ॥
  73. ॐ जगद्व्यापिने नमः ॥
  74. ॐ जगद्गुरवे नमः ॥
  75. ॐ व्योमकेशाय नमः ॥
  76. ॐ महासेन जनकाय नमः ॥
  77. ॐ चारुविक्रमाय नमः ॥
  78. ॐ रुद्राय नमः ॥
  79. ॐ भूतपतये नमः ॥
  80. ॐ स्थाणवे नमः ॥ ८० ॥
  81. ॐ अहिर्भुथ्न्याय नमः ॥
  82. ॐ दिगंबराय नमः ॥
  83. ॐ अष्टमूर्तये नमः ॥
  84. ॐ अनेकात्मने नमः ॥
  85. ॐ स्वात्त्विकाय नमः ॥
  86. ॐ शुद्धविग्रहाय नमः ॥
  87. ॐ शाश्वताय नमः ॥
  88. ॐ खंडपरशवे नमः ॥
  89. ॐ अजाय नमः ॥
  90. ॐ पाशविमोचकाय नमः ॥ ९० ॥
  91. ॐ मृडाय नमः ॥
  92. ॐ पशुपतये नमः ॥
  93. ॐ देवाय नमः ॥
  94. ॐ महादेवाय नमः ॥
  95. ॐ अव्ययाय नमः ॥
  96. ॐ हरये नमः ॥
  97. ॐ पूषदंतभिदे नमः ॥
  98. ॐ अव्यग्राय नमः ॥
  99. ॐ दक्षाध्वरहराय नमः ॥
  100. ॐ हराय नमः ॥ १०० ॥
  101. ॐ भगनेत्रभिदे नमः ॥
  102. ॐ अव्यक्ताय नमः ॥
  103. ॐ सहस्राक्षाय नमः ॥
  104. ॐ सहस्रपादे नमः ॥
  105. ॐ अपपर्गप्रदाय नमः ॥
  106. ॐ अनंताय नमः ॥
  107. ॐ तारकाय नमः ॥
  108. ॐ परमेश्वराय नमः ॥ १०८ ॥

भगवान शिव के प्रमुख स्वरूप

भगवान शिव के अनेक दिव्य स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिनमें प्रमुख हैं—

  • महादेव

  • रुद्र

  • नटराज

  • अर्धनारीश्वर

  • दक्षिणामूर्ति

  • भैरव

  • पशुपतिनाथ

  • विश्वनाथ

  • सोमेश्वर

  • केदारनाथ

  • ओंकारेश्वर

  • महाकालेश्वर

प्रत्येक स्वरूप भक्तों को अलग-अलग आध्यात्मिक संदेश देता है।


भगवान शिव के 100 नामों का आध्यात्मिक संदेश

भगवान शिव के नाम हमें यह शिक्षा देते हैं कि—

  • सरलता ही महानता है।

  • अहंकार का त्याग करें।

  • सत्य और धर्म का पालन करें।

  • करुणा और क्षमा का भाव रखें।

  • आत्मचिंतन एवं ध्यान को जीवन का हिस्सा बनाएं।

  • प्रकृति और सभी जीवों का सम्मान करें।


FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

1. श्री शिव स्तोत्रम् शत नामावली क्या है?

यह भगवान शिव के 100 पवित्र नामों का संग्रह है, जिनका पाठ पूजा एवं साधना में किया जाता है।

2. क्या शिव के 100 नाम प्रतिदिन पढ़ सकते हैं?

हाँ, श्रद्धा के साथ प्रतिदिन या प्रत्येक सोमवार इनका पाठ किया जा सकता है।

3. क्या महिलाएँ भी शिव शत नामावली का पाठ कर सकती हैं?

हाँ, यह नामावली सभी श्रद्धालुओं के लिए उपयुक्त है।

4. शिव शत नामावली का पाठ किस दिन विशेष फलदायी माना जाता है?

सोमवार, श्रावण मास, प्रदोष व्रत और महाशिवरात्रि पर इसका विशेष महत्व माना जाता है।

5. क्या शिव शत नामावली और शिव अष्टोत्तर शतनामावली अलग हैं?

कुछ ग्रंथों में नामों का क्रम और संख्या भिन्न हो सकती है, लेकिन दोनों का उद्देश्य भगवान शिव के दिव्य नामों का स्मरण और स्तुति करना है।


श्री शिव स्तोत्रम् शत नामावली भगवान शिव के 100 दिव्य नामों का पवित्र संकलन है। प्रत्येक नाम महादेव के किसी विशेष गुण, शक्ति और करुणामय स्वरूप का स्मरण कराता है। श्रद्धा एवं नियमित पाठ से मन में शांति, आत्मबल, भक्ति और आध्यात्मिक जागरूकता विकसित होती है। भगवान शिव के इन पावन नामों का जप केवल पूजा का एक भाग नहीं, बल्कि सत्य, सरलता, त्याग और कल्याणकारी जीवन जीने की प्रेरणा भी है।


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