पंचांग राशिफल अंक राशिफल भक्ति का मार्ग त्योहार लव कैलकुलेटर
मंत्र

नवग्रह स्तोत्र – संपूर्ण पाठ, अर्थ, महत्व, लाभ एवं पाठ विधि

5 मिनट पढ़ें
नवग्रह स्तोत्र – संपूर्ण पाठ, अर्थ, महत्व, लाभ एवं पाठ विधि

नवग्रह स्तोत्र क्या है?

नवग्रह स्तोत्र महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित एक अत्यंत प्रभावशाली वैदिक स्तोत्र है, जिसमें सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु – इन नौ ग्रहों की स्तुति की गई है। सनातन धर्म में नवग्रहों का मानव जीवन पर गहरा प्रभाव माना गया है। कुंडली में ग्रहों की शुभ या अशुभ स्थिति व्यक्ति के स्वास्थ्य, शिक्षा, विवाह, करियर, धन, संतान और आध्यात्मिक जीवन को प्रभावित कर सकती है।

नवग्रह स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से ग्रहों की शांति, मानसिक संतुलन, सकारात्मक ऊर्जा तथा जीवन में आने वाली अनेक बाधाओं से राहत मिलने की मान्यता है।


नवग्रह स्तोत्र का संपूर्ण पाठ

☀️ सूर्य (रवि)

जपाकुसुमसंकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम्।
तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥

? चंद्र (सोम)

दधिशङ्खतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम्।
नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम्॥

♂️ मंगल

धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम्।
कुमारं शक्तिहस्तं तं मङ्गलं प्रणमाम्यहम्॥

☿️ बुध

प्रियङ्गुकलिकाश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम्।
सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम्॥

♃ गुरु (बृहस्पति)

देवानां च ऋषीणां च गुरुं काञ्चनसन्निभम्।
बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्॥

♀️ शुक्र

हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम्।
सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम्॥

♄ शनि

नीलाञ्जनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥

☊ राहु

अर्धकायं महावीर्यं चन्द्रादित्यविमर्दनम्।
सिंहिकागर्भसम्भूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम्॥

☋ केतु

पलाशपुष्पसंकाशं तारकाग्रहमस्तकम्।
रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम्॥


फलश्रुति

इति व्यासमुखोद्गीतं यः पठेत्सुसमाहितः।
दिवा वा यदि वा रात्रौ विघ्नशान्तिर्भविष्यति॥

नरनारीनृपाणां च भवेद्दुःस्वप्ननाशनम्।
ऐश्वर्यमतुलं तेषामारोग्यं पुष्टिवर्धनम्॥

ग्रहनक्षत्रजाः पीडास्तस्कराग्निसमुद्भवाः।
ताः सर्वाः प्रशमं यान्ति व्यासो ब्रूते न संशयः॥

॥ इति श्रीव्यासविरचितं नवग्रहस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥


नवग्रह स्तोत्र का महत्व

नवग्रह स्तोत्र केवल ग्रहों की स्तुति नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय शक्तियों के प्रति श्रद्धा और संतुलन का प्रतीक है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नौ ग्रह व्यक्ति के कर्मफल को प्रभावित करते हैं। नियमित रूप से इस स्तोत्र का पाठ करने से ग्रहों की शुभता में वृद्धि तथा अशुभ प्रभावों की शांति होने की मान्यता है।

विशेष रूप से जिन लोगों की कुंडली में शनि दोष, राहु-केतु दोष, पितृ दोष, चंद्र दोष या अन्य ग्रह पीड़ाएं होती हैं, उनके लिए यह स्तोत्र अत्यंत उपयोगी माना जाता है।


नवग्रह स्तोत्र के लाभ

  • नवग्रहों की कृपा प्राप्त करने में सहायक।

  • ग्रह दोषों की शांति में लाभकारी।

  • मानसिक तनाव, भय और नकारात्मकता में कमी।

  • शिक्षा, करियर और व्यापार में सफलता का मार्ग प्रशस्त।

  • स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि।

  • आर्थिक स्थिरता एवं समृद्धि की प्राप्ति।

  • बुरे स्वप्न, बाधाओं एवं अनावश्यक भय से मुक्ति।

  • आध्यात्मिक उन्नति एवं मन की शांति।


नवग्रह स्तोत्र का पाठ कब करें?

नियमित रूप से प्रातःकाल स्नान के बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके इसका पाठ करना शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो सूर्य को अर्घ्य देने के पश्चात नवग्रह स्तोत्र का पाठ करें।

विशेष अवसर:

  • रविवार से शनिवार तक प्रतिदिन।

  • नवग्रह शांति पूजा।

  • ग्रहण काल के बाद शुद्धि के उपरांत।

  • जन्मदिन या महत्वपूर्ण कार्य से पहले।

  • कुंडली में ग्रह दोष होने पर।

  • अमावस्या, पूर्णिमा एवं संक्रांति।


पाठ विधि

  1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

  2. भगवान गणेश एवं अपने इष्टदेव का स्मरण करें।

  3. नवग्रह या सूर्य देव के चित्र के समक्ष दीपक एवं धूप जलाएं।

  4. श्रद्धा और एकाग्रता से नवग्रह स्तोत्र का पाठ करें।

  5. अंत में सभी ग्रहों से जीवन में सुख, स्वास्थ्य एवं समृद्धि की प्रार्थना करें।


नवग्रह स्तोत्र और ज्योतिष

वैदिक ज्योतिष में नवग्रह जीवन के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं—

  • सूर्य – आत्मबल, नेतृत्व, प्रतिष्ठा

  • चंद्र – मन, भावनाएँ, माता

  • मंगल – साहस, भूमि, ऊर्जा

  • बुध – बुद्धि, वाणी, व्यापार

  • गुरु – ज्ञान, धर्म, संतान

  • शुक्र – सुख, वैभव, दांपत्य

  • शनि – कर्म, न्याय, धैर्य

  • राहु – महत्वाकांक्षा, विदेश, आधुनिक तकनीक

  • केतु – वैराग्य, आध्यात्मिकता, मोक्ष


नवग्रह स्तोत्र श्रद्धा, भक्ति और ज्योतिषीय संतुलन का अद्भुत संगम है। इसका नियमित पाठ जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, ग्रहों की कृपा और मानसिक शांति प्रदान करने वाला माना गया है। यदि इसे सच्ची श्रद्धा और नियमितता के साथ पढ़ा जाए तो यह आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ जीवन की अनेक कठिनाइयों को कम करने में सहायक माना जाता है।

॥ ॐ आदित्याय नमः ॥
॥ ॐ सोमाय नमः ॥
॥ ॐ नवग्रहेभ्यो नमः ॥


 FAQ (SEO)

  1. नवग्रह स्तोत्र किसने लिखा है?
    नवग्रह स्तोत्र महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित माना जाता है।
  2. नवग्रह स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?
    प्रतिदिन प्रातःकाल, सूर्य को अर्घ्य देने के बाद या नवग्रह शांति पूजा के समय इसका पाठ करना शुभ माना जाता है।
  3. क्या नवग्रह स्तोत्र ग्रह दोष दूर करता है?
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और नियमित पाठ से ग्रहों की शांति तथा सकारात्मक प्रभाव प्राप्त होने की मान्यता है। यह आध्यात्मिक साधना का एक महत्वपूर्ण अंग है।
  4. नवग्रह स्तोत्र पढ़ने से क्या लाभ होता है?
    मानसिक शांति, आत्मविश्वास, ग्रहों की कृपा, स्वास्थ्य, समृद्धि और जीवन की बाधाओं में कमी का अनुभव होने की मान्यता है।