माँ तुलसी अष्टोत्तर शतनाम नामावली
माँ तुलसी अष्टोत्तर शतनाम नामावली (Tulsi Ashtottara Shatanamavali) तुलसी माता के 108 पवित्र एवं दिव्य नामों का संग्रह है। सनातन धर्म में तुलसी को केवल एक पौधा नहीं, बल्कि भगवान विष्णु की प्रिय देवी वृंदा का स्वरूप माना गया है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार तुलसी के 108 नामों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करने से मन में भक्ति, पवित्रता, सकारात्मकता और आध्यात्मिक शांति का संचार होता है।
तुलसी माता के 108 नामों का पाठ विशेष रूप से तुलसी विवाह, देवउठनी एकादशी, कार्तिक मास, एकादशी, गुरुवार, शुक्रवार तथा दैनिक विष्णु-लक्ष्मी पूजा के समय किया जाता है।
माँ तुलसी अष्टोत्तर शतनाम नामावली क्या है?
अष्टोत्तर शतनामावली का अर्थ है 108 पवित्र नामों का संग्रह।
माँ तुलसी के प्रत्येक नाम में उनके किसी विशेष स्वरूप, गुण, शक्ति और दिव्यता का वर्णन मिलता है। भक्त इन नामों का उच्चारण करते हुए तुलसी माता को प्रणाम करते हैं और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं।
तुलसी को शास्त्रों में—
- वृंदा
- विष्णुप्रिया
- हरिप्रिया
- कृष्णजीवनी
- पवित्रा
- पुण्यदा
- मोक्षप्रदा
- भक्तवत्सला
आदि अनेक नामों से संबोधित किया गया है।
108 संख्या का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म में 108 संख्या अत्यंत पवित्र मानी जाती है। यह पूर्णता, आध्यात्मिक साधना और ईश्वर से जुड़ाव का प्रतीक है।
108 संख्या का महत्व—
- जपमाला में 108 मनके होते हैं।
- अनेक देवी-देवताओं के 108 नामों का पाठ किया जाता है।
- योग एवं ध्यान में 108 का विशेष महत्व है।
- वैदिक परंपरा में इसे शुभ एवं आध्यात्मिक संख्या माना गया है।
माँ तुलसी का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म में तुलसी माता को भगवान विष्णु की प्रिय माना गया है। लगभग प्रत्येक वैष्णव घर में तुलसी का पौधा स्थापित किया जाता है और उसकी प्रतिदिन पूजा की जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार—
- भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित किए बिना पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती।
- तुलसी घर में पवित्रता और सकारात्मक वातावरण का प्रतीक मानी जाती हैं।
- तुलसी विवाह का विशेष धार्मिक महत्व है।
- कार्तिक मास में तुलसी पूजन अत्यंत शुभ माना जाता है।
माँ तुलसी के 108 नामों का महत्व
तुलसी माता के प्रत्येक नाम में उनके किसी दिव्य गुण का वर्णन मिलता है।
जैसे—
- वृंदा – दिव्य स्वरूप वाली।
- विष्णुप्रिया – भगवान विष्णु की प्रिय।
- हरिप्रिया – श्रीहरि को प्रिय।
- पुण्यदा – पुण्य प्रदान करने वाली।
- मोक्षप्रदा – मोक्ष का मार्ग दिखाने वाली।
- भक्तवत्सला – भक्तों पर स्नेह रखने वाली।
इन नामों का स्मरण भक्त के मन में श्रद्धा, भक्ति और सदाचार की भावना को मजबूत करता है।
माँ तुलसी अष्टोत्तर शतनामावली के आध्यात्मिक लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धापूर्वक पाठ करने से निम्नलिखित आध्यात्मिक लाभ प्राप्त हो सकते हैं—
1. भगवान विष्णु के प्रति भक्ति बढ़ती है।
2. मन में शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
3. घर में धार्मिक वातावरण और आध्यात्मिकता की भावना मजबूत होती है।
4. परिवार में प्रेम, सौहार्द एवं मंगल की भावना विकसित होती है।
5. नियमित पूजा एवं जप की प्रेरणा मिलती है।
6. मन में कृतज्ञता, सेवा और विनम्रता का भाव उत्पन्न होता है।
महत्वपूर्ण सूचना: उपर्युक्त लाभ धार्मिक एवं आध्यात्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें किसी निश्चित भौतिक या चमत्कारी परिणाम की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।
माँ तुलसी अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ कब करें?
इन 108 नामों का पाठ निम्न अवसरों पर विशेष शुभ माना जाता है—
- प्रतिदिन प्रातःकाल
- एकादशी
- देवउठनी एकादशी
- तुलसी विवाह
- कार्तिक मास
- गुरुवार
- शुक्रवार
- श्री विष्णु एवं लक्ष्मी पूजा
- वैष्णव पर्व
माँ तुलसी अष्टोत्तर शतनामावली के पाठ की विधि
1. स्नान एवं शुद्धता
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2. तुलसी पूजन
तुलसी माता के पौधे के सामने दीपक जलाएँ तथा जल अर्पित करें।
3. पूजन सामग्री
- जल
- दीपक
- धूप
- पुष्प
- रोली
- अक्षत
- मौली
- नैवेद्य
4. ध्यान करें
माता तुलसी एवं भगवान श्रीहरि विष्णु का ध्यान करें।
5. नामावली का पाठ
श्रद्धा एवं एकाग्रता के साथ तुलसी माता के 108 नामों का पाठ करें।
6. आरती एवं प्रार्थना
पाठ पूर्ण होने के बाद तुलसी माता की आरती करें तथा भगवान विष्णु को प्रणाम करें।
माँ तुलसी अष्टोत्तर शतनामावली (108 नाम)
यहाँ आपकी "माँ तुलसी अष्टोत्तर शतनाम नामावली" के सभी 108 नाम क्रमवार जोड़ें।
ॐ श्री तुलस्यै नमः । ॐ नन्दिन्यै नमः । ॐ देव्यै नमः । ॐ शिखिन्यै नमः । ॐ धारिण्यै नमः । ॐ धात्र्यै नमः । ॐ सावित्र्यै नमः । ॐ सत्यसन्धायै नमः । ॐ कालहारिण्यै नमः । ॐ गौर्यै नमः॥ १० ॥ ॐ देवगीतायै नमः । ॐ द्रवीयस्यै नमः । ॐ पद्मिन्यै नमः । ॐ सीतायै नमः । ॐ रुक्मिण्यै नमः । ॐ प्रियभूषणायै नमः । ॐ श्रेयस्यै नमः । ॐ श्रीमत्यै नमः । ॐ मान्यायै नमः । ॐ गौर्यै नमः ॥ २० ॥ ॐ गौतमार्चितायै नमः । ॐ त्रेतायै नमः । ॐ त्रिपथगायै नमः । ॐ त्रिपादायै नमः । ॐ त्रैमूर्त्यै नमः । ॐ जगत्रयायै नमः । ॐ त्रासिन्यै नमः । ॐ गात्रायै नमः । ॐ गात्रियायै नमः । ॐ गर्भवारिण्यै नमः ॥ ३० ॥ ॐ शोभनायै नमः । ॐ समायै नमः । ॐ द्विरदायै नमः । ॐ आराद्यै नमः । ॐ यज्ञविद्यायै नमः । ॐ महाविद्यायै नमः । ॐ गुह्यविद्यायै नमः । ॐ कामाक्ष्यै नमः । ॐ कुलायै नमः । ॐ श्रीयै नमः ॥ ४० ॥ ॐ भूम्यै नमः । ॐ भवित्र्यै नमः । ॐ सावित्र्यै नमः । ॐ सरवेदविदाम्वरायै नमः । ॐ शंखिन्यै नमः । ॐ चक्रिण्यै नमः । ॐ चारिण्यै नमः । ॐ चपलेक्षणायै नमः । ॐ पीताम्बरायै नमः । ॐ प्रोत सोमायै नमः ॥ ५० ॥ ॐ सौरसायै नमः । ॐ अक्षिण्यै नमः । ॐ अम्बायै नमः । ॐ सरस्वत्यै नमः । ॐ संश्रयायै नमः । ॐ सर्व देवत्यै नमः । ॐ विश्वाश्रयायै नमः । ॐ सुगन्धिन्यै नमः । ॐ सुवासनायै नमः । ॐ वरदायै नमः ॥ ६० ॥ ॐ सुश्रोण्यै नमः । ॐ चन्द्रभागायै नमः । ॐ यमुनाप्रियायै नमः । ॐ कावेर्यै नमः । ॐ मणिकर्णिकायै नमः । ॐ अर्चिन्यै नमः । ॐ स्थायिन्यै नमः । ॐ दानप्रदायै नमः । ॐ धनवत्यै नमः । ॐ सोच्यमानसायै नमः ॥ ७० ॥ ॐ शुचिन्यै नमः । ॐ श्रेयस्यै नमः । ॐ प्रीतिचिन्तेक्षण्यै नमः । ॐ विभूत्यै नमः । ॐ आकृत्यै नमः । ॐ आविर्भूत्यै नमः । ॐ प्रभाविन्यै नमः । ॐ गन्धिन्यै नमः । ॐ स्वर्गिन्यै नमः । ॐ गदायै नमः ॥ ८० ॥ ॐ वेद्यायै नमः । ॐ प्रभायै नमः । ॐ सारस्यै नमः । ॐ सरसिवासायै नमः । ॐ सरस्वत्यै नमः । ॐ शरावत्यै नमः । ॐ रसिन्यै नमः । ॐ काळिन्यै नमः । ॐ श्रेयोवत्यै नमः । ॐ यामायै नमः ॥ ९० ॥ ॐ ब्रह्मप्रियायै नमः । ॐ श्यामसुन्दरायै नमः । ॐ रत्नरूपिण्यै नमः । ॐ शमनिधिन्यै नमः । ॐ शतानन्दायै नमः । ॐ शतद्युतये नमः । ॐ शितिकण्ठायै नमः । ॐ प्रयायै नमः । ॐ धात्र्यै नमः । ॐ श्री वृन्दावन्यै नमः ॥ १०० ॥ ॐ कृष्णायै नमः । ॐ भक्तवत्सलायै नमः । ॐ गोपिकाक्रीडायै नमः । ॐ हरायै नमः । ॐ अमृतरूपिण्यै नमः । ॐ भूम्यै नमः । ॐ श्री कृष्णकान्तायै नमः । ॐ श्री तुलस्यै नमः ॥ १०८ ॥
माँ तुलसी की पूजा का महत्व
तुलसी माता की पूजा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान का भी संदेश देती है। तुलसी का पौधा भारतीय संस्कृति में पवित्रता, पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक जीवन का प्रतीक माना जाता है।
तुलसी हमें सिखाती हैं कि प्रकृति और ईश्वर दोनों का सम्मान करना जीवन का महत्वपूर्ण धर्म है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
1. माँ तुलसी अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?
यह तुलसी माता के 108 पवित्र नामों का संग्रह है, जिनका पाठ पूजा एवं साधना में किया जाता है।
2. तुलसी के 108 नाम कब पढ़ने चाहिए?
प्रतिदिन, विशेषकर एकादशी, कार्तिक मास, तुलसी विवाह और देवउठनी एकादशी पर।
3. क्या महिलाएँ भी इसका पाठ कर सकती हैं?
हाँ, यह नामावली सभी श्रद्धालुओं के लिए उपयुक्त है।
4. क्या तुलसी पूजा बिना विष्णु पूजा के की जा सकती है?
हाँ, तुलसी माता की स्वतंत्र पूजा की जा सकती है। साथ ही भगवान विष्णु के साथ उनकी पूजा का भी विशेष महत्व माना गया है।
5. तुलसी के 108 नाम पढ़ने का उद्देश्य क्या है?
माता तुलसी के दिव्य गुणों का स्मरण, भगवान विष्णु के प्रति भक्ति और आध्यात्मिक जीवन को सुदृढ़ बनाना।
माँ तुलसी अष्टोत्तर शतनाम नामावली केवल 108 नामों का संग्रह नहीं, बल्कि भक्ति, पवित्रता, सेवा और भगवान विष्णु के प्रति समर्पण का दिव्य मार्ग है। प्रत्येक नाम तुलसी माता के एक विशिष्ट स्वरूप और गुण का स्मरण कराता है। श्रद्धा और नियमितता के साथ इन नामों का पाठ मन में शांति, सकारात्मकता और आध्यात्मिक उन्नति की भावना विकसित करता है।
संबंधित मंत्र एवं स्तोत्र
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- तुलसी आरती
- तुलसी विवाह
- तुलसी पूजा विधि
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- श्री विष्णु सहस्रनाम
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