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श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली | माता लक्ष्मी के 108 नाम, अर्थ, महत्व एवं पाठ विधि

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श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली | माता लक्ष्मी के 108 नाम, अर्थ, महत्व एवं पाठ विधि

श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली

श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली (Lakshmi Ashtottara Shatanamavali) माता महालक्ष्मी के 108 पवित्र नामों का संग्रह है। सनातन धर्म में इन 108 नामों का जाप अत्यंत शुभ माना जाता है। प्रत्येक नाम माता लक्ष्मी के किसी विशेष गुण, स्वरूप, शक्ति और कृपा का वर्णन करता है।

शुक्रवार, दीपावली, धनतेरस, कोजागरी पूर्णिमा, वरलक्ष्मी व्रत तथा दैनिक लक्ष्मी पूजा के समय इन 108 नामों का श्रद्धापूर्वक पाठ करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और भक्ति के साथ नामावली का जाप करने से मन में सकारात्मकता, शांति, संतोष तथा ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना बढ़ती है।


श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?

अष्टोत्तर शतनामावली का अर्थ है 108 पवित्र नामों की माला

"अष्टोत्तर" का अर्थ है 100 + 8, अर्थात 108।

इन नामों के माध्यम से भक्त माता महालक्ष्मी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते हैं।

इनमें देवी के अनेक दिव्य रूपों का वर्णन मिलता है जैसे—

  • कमलवासिनी

  • विष्णुपत्नी

  • हरिप्रिया

  • पद्मा

  • पद्महस्ता

  • पद्माक्षी

  • पद्ममालाधरा

  • लोकमाता

  • श्री

  • नारायणी

  • महालक्ष्मी

प्रत्येक नाम देवी के एक विशेष गुण और शक्ति का प्रतीक है।


108 संख्या का धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में 108 संख्या अत्यंत पवित्र मानी जाती है।

इसका महत्व अनेक धार्मिक परंपराओं में मिलता है—

  • जपमाला में 108 मनके होते हैं।

  • उपनिषदों की संख्या 108 मानी जाती है।

  • अनेक देवी-देवताओं के 108 नामों का पाठ किया जाता है।

  • योग और ध्यान में भी 108 का विशेष महत्व बताया गया है।

यह संख्या पूर्णता, आध्यात्मिक संतुलन और ईश्वर से जुड़ाव का प्रतीक मानी जाती है।


माता लक्ष्मी के 108 नामों का महत्व

श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली में प्रत्येक नाम देवी के किसी न किसी दिव्य स्वरूप का प्रतिनिधित्व करता है।

उदाहरण के लिए—

  • पद्मा — कमल के समान निर्मलता

  • हरिप्रिया — भगवान विष्णु की प्रिय

  • लोकमाता — सम्पूर्ण जगत की माता

  • नारायणी — भगवान नारायण की शक्ति

  • श्री — समृद्धि एवं मंगल का स्वरूप

इन नामों का स्मरण केवल भौतिक समृद्धि के लिए नहीं, बल्कि सदाचार, संतोष और धर्ममय जीवन की प्रेरणा के लिए भी किया जाता है।


श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली के आध्यात्मिक लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धापूर्वक पाठ करने से—

✔ मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

✔ माता लक्ष्मी के प्रति भक्ति बढ़ती है।

✔ मानसिक शांति एवं आत्मविश्वास विकसित होता है।

✔ परिवार में प्रेम एवं सौहार्द की भावना मजबूत होती है।

✔ धन के प्रति जिम्मेदारी और सदुपयोग की प्रेरणा मिलती है।

✔ ईश्वर के प्रति कृतज्ञता का भाव विकसित होता है।

महत्वपूर्ण सूचना: उपर्युक्त लाभ धार्मिक एवं आध्यात्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें किसी निश्चित आर्थिक या चमत्कारी परिणाम की गारंटी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।


श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ कब करें?

इन 108 नामों का पाठ निम्न अवसरों पर विशेष शुभ माना जाता है—

  • प्रतिदिन प्रातःकाल

  • शुक्रवार

  • दीपावली

  • धनतेरस

  • कोजागरी पूर्णिमा

  • अक्षय तृतीया

  • वरलक्ष्मी व्रत

  • शरद पूर्णिमा

  • लक्ष्मी पूजन


पाठ की विधि

  • स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

  • पूजा स्थान पर माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।

  • घी का दीपक एवं धूप जलाएं।

  • कमल अथवा लाल पुष्प अर्पित करें।

  • श्रीसूक्त या लक्ष्मी मंत्र का जप करें।

  • अब श्रद्धा से 108 नामों का पाठ करें।

  • अंत में आरती कर प्रसाद वितरित करें।


श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली (108 नाम)

  1. ॐ प्रकृत्यै नमः ॥
  2. ॐ विकृत्यै नमः ॥
  3. ॐ विद्यायै नमः ॥
  4. ॐ सर्वभूतहितप्रदायै नमः ॥
  5. ॐ श्रद्धायै नमः ॥
  6. ॐ विभूत्यै नमः ॥
  7. ॐ सुरभ्यै नमः ॥
  8. ॐ परमात्मिकायै नमः ॥
  9. ॐ वाचे नमः ॥
  10. ॐ पद्मालयायै नमः ॥ 10 ॥
  11. ॐ पद्मायै नमः ॥
  12. ॐ शुचये नमः ॥
  13. ॐ स्वाहायै नमः ॥
  14. ॐ स्वधायै नमः ॥
  15. ॐ सुधायै नमः ॥
  16. ॐ धन्यायै नमः ॥
  17. ॐ हिरण्मय्यै नमः ॥
  18. ॐ लक्ष्म्यै नमः ॥
  19. ॐ नित्यपुष्टायै नमः ॥
  20. ॐ विभावर्यै नमः ॥ 20 ॥
  21. ॐ अदित्यै नमः ॥
  22. ॐ दित्ये नमः ॥
  23. ॐ दीपायै नमः ॥
  24. ॐ वसुधायै नमः ॥
  25. ॐ वसुधारिण्यै नमः ॥
  26. ॐ कमलायै नमः ॥
  27. ॐ कान्तायै नमः ॥
  28. ॐ कामाक्ष्यै नमः ॥
  29. ॐ क्ष्रीरोधसंभवाम् नमः ॥
  30. ॐ क्रोधसंभवायै नमः ॥ 30 ॥
  31. ॐ अनुग्रहप्रदायै नमः ॥
  32. ॐ बुद्धये नमः ॥
  33. ॐ अनघायै नमः ॥
  34. ॐ हरिवल्लभायै नमः ॥
  35. ॐ अशोकायै नमः ॥
  36. ॐ अमृतायै नमः ॥
  37. ॐ दीप्तायै नमः ॥
  38. ॐ लोकशोकविनाशिन्यै नमः ॥
  39. ॐ धर्मनिलयायै नमः ॥
  40. ॐ करुणायै नमः ॥ 40 ॥
  41. ॐ लोकमात्रे नमः ॥
  42. ॐ पद्मप्रियायै नमः ॥
  43. ॐ पद्महस्तायै नमः ॥
  44. ॐ पद्माक्ष्यै नमः ॥
  45. ॐ पद्मसुन्दर्यै नमः ॥
  46. ॐ पद्मोद्भवायै नमः ॥
  47. ॐ पद्ममुख्यै नमः ॥
  48. ॐ पद्मनाभप्रियायै नमः ॥
  49. ॐ रमायै नमः ॥
  50. ॐ पद्ममालाधरायै नमः ॥ 50 ॥
  51. ॐ देव्यै नमः ॥
  52. ॐ पद्मिन्यै नमः ॥
  53. ॐ पद्मगन्धिन्यै नमः ॥
  54. ॐ पुण्यगन्धायै नमः ॥
  55. ॐ सुप्रसन्नायै नमः ॥
  56. ॐ प्रसादाभिमुख्यै नमः ॥
  57. ॐ प्रभायै नमः ॥
  58. ॐ चन्द्रवदनायै नमः ॥
  59. ॐ चन्द्रायै नमः ॥
  60. ॐ चन्द्रसहोदर्यै नमः ॥ 60 ॥
  61. ॐ चतुर्भुजायै नमः ॥
  62. ॐ चन्द्ररूपायै नमः ॥
  63. ॐ इन्दिरायै नमः ॥
  64. ॐ इन्दुशीतलायै नमः ॥
  65. ॐ आह्लादजनन्यै नमः ॥
  66. ॐ पुष्टयै नमः ॥
  67. ॐ शिवायै नमः ॥
  68. ॐ शिवकर्यै नमः ॥
  69. ॐ सत्यै नमः ॥
  70. ॐ विमलायै नमः ॥ 70 ॥
  71. ॐ विश्वजनन्यै नमः ॥
  72. ॐ तुष्टयै नमः ॥
  73. ॐ दारिद्र्यनाशिन्यै नमः ॥
  74. ॐ प्रीतिपुष्करिण्यै नमः ॥
  75. ॐ शान्तायै नमः ॥
  76. ॐ शुक्लमाल्यांबरायै नमः ॥
  77. ॐ श्रियै नमः ॥
  78. ॐ भास्कर्यै नमः ॥
  79. ॐ बिल्वनिलयायै नमः ॥
  80. ॐ वरारोहायै नमः ॥ 80 ॥
  81. ॐ यशस्विन्यै नमः ॥
  82. ॐ वसुन्धरायै नमः ॥
  83. ॐ उदारांगायै नमः ॥
  84. ॐ हरिण्यै नमः ॥
  85. ॐ हेममालिन्यै नमः ॥
  86. ॐ धनधान्यकर्ये नमः ॥
  87. ॐ सिद्धये नमः ॥
  88. ॐ स्त्रैणसौम्यायै नमः ॥
  89. ॐ शुभप्रदाये नमः ॥
  90. ॐ नृपवेश्मगतानन्दायै नमः ॥ 90 ॥
  91. ॐ वरलक्ष्म्यै नमः ॥
  92. ॐ वसुप्रदायै नमः ॥
  93. ॐ शुभायै नमः ॥
  94. ॐ हिरण्यप्राकारायै नमः ॥
  95. ॐ समुद्रतनयायै नमः ॥
  96. ॐ जयायै नमः ॥
  97. ॐ मंगळा देव्यै नमः ॥
  98. ॐ विष्णुवक्षस्स्थलस्थितायै नमः ॥
  99. ॐ विष्णुपत्न्यै नमः ॥
  100. ॐ प्रसन्नाक्ष्यै नमः ॥ 100 ॥
  101. ॐ नारायणसमाश्रितायै नमः ॥
  102. ॐ दारिद्र्यध्वंसिन्यै नमः ॥
  103. ॐ देव्यै नमः ॥
  104. ॐ सर्वोपद्रव वारिण्यै नमः ॥
  105. ॐ नवदुर्गायै नमः ॥
  106. ॐ महाकाल्यै नमः ॥
  107. ॐ ब्रह्माविष्णुशिवात्मिकायै नमः ॥
  108. ॐ त्रिकालज्ञानसंपन्नायै नमः ॥ 108 ॥
॥ इति श्रीलक्ष्मीष्टोत्तरशतनामावलिः सम्पूर्णा ॥

श्री लक्ष्मी के प्रमुख स्वरूप

माता लक्ष्मी के अनेक स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिनमें प्रमुख हैं—

  • आदि लक्ष्मी

  • धन लक्ष्मी

  • धान्य लक्ष्मी

  • गज लक्ष्मी

  • संतान लक्ष्मी

  • विजय लक्ष्मी

  • विद्या लक्ष्मी

  • धैर्य लक्ष्मी

इन आठ स्वरूपों को सामूहिक रूप से अष्टलक्ष्मी कहा जाता है।


FAQ

श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?

यह माता महालक्ष्मी के 108 पवित्र नामों का संग्रह है, जिनका जप पूजा और साधना में किया जाता है।


क्या 108 नाम प्रतिदिन पढ़ सकते हैं?

हाँ, श्रद्धा के साथ प्रतिदिन या प्रत्येक शुक्रवार इसका पाठ किया जा सकता है।


क्या महिलाएँ भी इसका पाठ कर सकती हैं?

हाँ, यह नामावली सभी श्रद्धालुओं के लिए उपयुक्त है।


क्या शुक्रवार को इसका विशेष महत्व है?

हाँ, शुक्रवार को माता लक्ष्मी का दिन माना जाता है, इसलिए इस दिन 108 नामों का पाठ विशेष शुभ माना जाता है।


क्या दीपावली पर इसका पाठ करना चाहिए?

दीपावली और धनतेरस पर लक्ष्मी पूजन के समय इसका पाठ अत्यंत लोकप्रिय और शुभ माना जाता है।


श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली केवल 108 नामों का संग्रह नहीं, बल्कि माता महालक्ष्मी के दिव्य गुणों का स्मरण है। प्रत्येक नाम भक्त को सत्य, संतोष, सेवा, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। श्रद्धा और नियमितता के साथ इन नामों का पाठ मन को शांति, सकारात्मकता और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना से भर देता है।


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