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मंत्र

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम् मंत्र का अर्थ, महत्व और जप विधि

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मंत्र क्या है? (सही पाठ)

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥


यह एक प्रसिद्ध शांति मंत्र है, जो ईशावास्य उपनिषद से लिया गया है।
मंत्र का सरल अर्थ
पूर्णमदः → वह (ईश्वर) पूर्ण है
पूर्णमिदम् → यह संसार भी पूर्ण है
पूर्णात् पूर्णमुदच्यते → पूर्ण से ही पूर्ण की उत्पत्ति होती है
पूर्णस्य पूर्णमादाय → पूर्ण में से पूर्ण निकालने पर भी
पूर्णमेवावशिष्यते → पूर्ण ही शेष रहता है

इसका अर्थ है:
ईश्वर और सृष्टि दोनों ही पूर्ण हैं, और पूर्णता कभी कम नहीं होती।

आध्यात्मिक महत्व

यह मंत्र हमें सिखाता है कि:
  • जीवन में सब कुछ पहले से ही पूर्ण है
  • कमी और अभाव केवल हमारी सोच में होते हैं
  • आत्मा और परमात्मा दोनों एक ही पूर्ण सत्य हैं
यह अद्वैत (Non-duality) का गहरा सिद्धांत दर्शाता है।

मंत्र जप की विधि

  • सुबह या शाम शांत स्थान पर बैठें
  • आँखें बंद कर ध्यान लगाएं
  • इस मंत्र का 11, 21 या 108 बार जप करें
  • अंत में “ॐ शांति शांति शांति” बोलें
ध्यान के साथ जप करने से अधिक लाभ मिलता है।

मंत्र जप के लाभ

  • मानसिक शांति :तनाव, चिंता और अशांति को दूर करता है
  • सकारात्मक सोच :जीवन में संतुलन और संतोष लाता है
  • आध्यात्मिक उन्नति : आत्मज्ञान और ध्यान में गहराई बढ़ाता है
  • जीवन में संतुलन: भावनात्मक और मानसिक संतुलन बनाता है

कब करें इस मंत्र का जप?

  • रोज सुबह ध्यान के समय
  • पूजा या यज्ञ के अंत में
  • जब मन अशांत हो

“शांति” तीन बार क्यों?

“ॐ शांति शांति शांति” तीन प्रकार के दुखों को शांत करने के लिए कहा जाता है:
  • आधिभौतिक (बाहरी कष्ट)
  • आधिदैविक (प्राकृतिक/दैवी कष्ट)
  • आध्यात्मिक (अंदरूनी कष्ट)

विशेष सुझाव

  • इस मंत्र को धीरे और स्पष्ट उच्चारण के साथ बोलें
  • नियमित अभ्यास से गहरा प्रभाव महसूस होगा
  • ध्यान और योग के साथ मिलाकर करें

निष्कर्ष

“ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम्…” मंत्र हमें जीवन की सच्चाई सिखाता है —
सब कुछ पूर्ण है, और हम भी उसी पूर्णता का हिस्सा हैं।
यह मंत्र शांति, संतुलन और आत्मज्ञान का मार्ग दिखाता है।